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बिहार में RTI कानून की गिरती स्थिति पर गंभीर चिंता: 28,000 लंबित अपीलों के बीच पटना हाईकोर्ट में जनहित

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पटना: बिहार में सूचना के अधिकार (RTI) कानून की प्रभावशीलता और कार्यप्रणाली पर बढ़ती चिंता के बीच अधिवक्ता प्रवीण कुमार ने पटना हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका दायर की है। इस याचिका में राज्य सूचना आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं और बताया गया है कि आयोग में वर्तमान में 28,291 द्वितीय अपीलें लंबित हैं। जबकि प्रथम अपील के लिए 45 दिनों की वैधानिक समय-सीमा तय है, द्वितीय अपीलों के लिए कोई समय-सीमा निर्धारित न होने के कारण प्रक्रिया पूरी तरह बाधित हो गई है और आम नागरिक वर्षों तक अपनी अपील की सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं। अधिवक्ता प्रवीण कुमार ने कोर्ट के समक्ष यह तथ्य रखा कि इस भारी बैकलॉग के कारण सूचना का अधिकार कानून बिहार में व्यावहारिक रूप से एक "मृत पत्र" बन गया है और इसके निराकरण के लिए हाईकोर्ट से द्वितीय अपीलों के निपटारे के लिए सख्त न्यायिक समय-सीमा तय करने, अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने और सतत निगरानी व रिपोर्टिंग के माध्यम से राज्य सूचना आयोग की प्रक्रिया की नियमित समीक्षा करने की मांग की गई है। याचिका में यह भी कहा गया है कि हाईकोर्ट केवल एक बार आदेश देने तक सीमित न रहे बल्कि तब तक निगरानी जारी रखे जब तक 28,000 से अधिक लंबित अपीलों का निपटारा न हो जाए। इस जनहित याचिका से बिहार के हजारों नागरिकों को सीधे राहत मिलने की संभावना है, जो वर्षों से अपनी अपीलों की सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह याचिका RTI कानून की मजबूती और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए निर्णायक साबित हो सकती है और भविष्य में आम नागरिक बिना बाधा के अपने सूचना अधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।

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